Bhramaramba Devi Temple Srisailam

भ्रामराम्बा देवी मंदिर

Bhramaramba Devi Temple Srisailam

भ्रामराम्बा देवी मंदिर नल्लामाला पहाड़ियों पर श्री मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर परिसर के भीतर स्थित है। मंदिर श्रीशैलम शहर में स्थित है,जो आंध्र प्रदेश के कुरनूल से 178 किमी की दूरी पर है। भ्रामराम्बा देवी मंदिर हिंदू धर्म के शैव और शक्ति संप्रदाय के भक्तों के बीच आस्था का अद्भुत आयोजन स्थल है|

यह 18 महा शक्ति पीठ में से एक है जो पूरे देश में स्थित है। शास्त्रों के अनुसार, इस पौराणिक स्थान में देवी सती की ग्रीवा (गर्दन) उनके आत्म-हरण के बाद गिरी थी। इस मंदिर का निर्माण देवी पार्वती के एक अवतार, देवी भ्रामारंबिका की स्मृति में किया गया था। हिंदू आस्था में, वह भगवान मल्लिकार्जुन स्वामी ( भगवान शिव) की अर्धांगिनी के रूप में मानी जाती हैं । भ्रामराम्बा देवी मंदिर “आदिपरिशक्ति” का पवित्र निवास स्थान माना गया है।

यह मंदिर कृष्णा नदी के दक्षिणी तट पर बना है और आंध्र प्रदेश में देवी को समर्पित सबसे प्रतिष्ठित मंदिर होने की लोकप्रियता इसे प्राप्त है। भ्रामराम्बा देवी या मधुमक्खियों की माँ को मंदिर परिसर में भ्राम शक्ति के रूप में पूजा जाता है। मंदिर के पास ही बारह ज्योतिर्लिंगों में से मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग स्थित है I एक ही मंदिर परिसर में भगवान शिव और देवी सती का सह-अस्तित्व इसे देश के सबसे अनोखे पवित्र स्थानों में से एक बनाता है।

समुद्र तल से 476 (1561 फीट) मीटर की ऊँचाई पर स्थित, भ्रामराम्बा देवी मंदिर सभी आगंतुकों को एक सुरम्य वातावरण प्रदान करता है। पारंपरिक हिंदू पौराणिक कथाओं में इस तीर्थस्थल की पहचान पृथ्वी पर ‘कैलाश’ के रूप में की है, जिसे यहाँ इला-कैलासम के नाम से जाना जाता है। श्रीशैलम के साथ एक समृद्ध पौराणिक और ऐतिहासिक अतीत जुड़ा हुआ है। मंदिर की प्रमुख देवी भ्रामराम्भा देवी हैं, जिनकी आठ हाथों वाली मूर्ति मंदिर के गर्भगृह में स्थित है।

भ्रामराम्बा देवी मंदिर के अक्षांश और देशांतर

17.36 55 ° उत्तर

78.55 65 ° पूर्व

भ्रामराम्बा देवी मंदिर कैसे पहुंचे

भ्रामराम्बा देवी मंदिर देश के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। यह आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम शहर में नल्लामाला पर्वत पर स्थित है। कोई भी शहर के किसी भी हिस्से से बस या टैक्सी द्वारा आसानी से इस मंदिर तक पहुँच सकता है। श्रीशैलम सड़क मार्ग से भारत के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

यह मंदिर कुंबुम रेलवे स्टेशन से 60 किमी और कुरनूल रेलवे स्टेशन से 92 किमी की दूरी पर है।निकटतम हवाई अड्डा मंदिर परिसर से 196 किमी की दूरी पर हैदराबाद हवाई अड्डा है, जो इसे देश के सभी प्रमुख शहरों से जोड़ता है।

दिल्ली से भ्रामराम्बा देवी मंदिर तक कैसे पहुंचे?

नई दिल्ली से भ्रामराम्बा देवी मंदिर तक सड़क मार्ग की दूरी लगभग 1,818 किमी है और इस यात्रा को पूरा करने में लगभग 31 घंटे लगते हैं।

नई दिल्ली से कुरनूल शहर तक कुछ ट्रेनें हैं:

नई दिल्ली से कुरनूल की रेल यात्रा करने के लिए लगभग 30 घंटे लगते हैं और कुरनूल से मंदिर पहुंचने के लिए लगभग 2 घंटे 40 मिनट की एक और यात्रा।

  • कोंगु एक्सप्रेस (12648)
  • आंध्र प्रदेश संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (12708)
  • कर्नाटक संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (12650)

नई दिल्ली से श्रीशैलम के लिए कई बसें भी चलती हैं जो एक दिन में मंदिर तक पहुंचने में मदद कर सकती हैं।

नई दिल्ली से हैदराबाद के लिए 2 घंटे की उड़ान और उसके बाद 3 घंटे की सड़क यात्रा के बाद मंदिर तक पहुंचने का सबसे तेज़ रास्ता है।

मुंबई से भ्रामराम्बा देवी मंदिर तक कैसे पहुंचे?

मुंबई और भ्रामराम्बा देवी मंदिर के बीच की दूरी सड़क के माध्यम से लगभग 912 किमी है, जिसमें लगभग 16 घंटे 40 मिनट लगते हैं।

मुंबई से श्रीशैलम के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं हैं।  मुंबई से गूटी के लिए ट्रेन ली जा सकती है और वहाँ से तक कुंबुम ट्रेन का लाभ उठा सकते हैं। मुंबई से कुंबुम तक ट्रेन से यात्रा करने में लगभग 20 घंटे लगते हैं और मंदिर परिसर तक पहुंचने के लिए यहाँ से लगभग दो घंटे की सड़क यात्रा।

वैकल्पिक रूप से, मुंबई से हैदराबाद के लिए 1 घंटे 15 मिनट की उड़ान भी ली सकती है और उसके बाद भ्रामराम्बा देवी मंदिर तक पहुंचने के लिए 3 घंटे की सड़क यात्रा है।

मुंबई से मरकापुरम के लिए कई बसें और टैक्सी उपलब्ध हैं जो लगभग 27 घंटे लेती हैं और मंदिर तक पहुँचने में आपकी मदद कर सकती हैं।

बैंगलोर से भ्रामराम्बा देवी मंदिर कैसे पहुँचें?

भ्रामराम्बा देवी मंदिर और बैंगलोर के बीच की दूरी सड़क के माध्यम से लगभग 533 किमी है जिसमें लगभग 10 घंटे लगते हैं।

बंगलौर से कुंबुम रेलवे स्टेशन तक कुछ ट्रेनें हैं:

  • प्रशांति एक्सप्रेस (18464)
  • कोंडावेदु एक्सप्रेस (17212)
  • बेंगलुरु कैंट-विजयवाड़ा पैसेंजर एक्सप्रेस (56503)

मंदिर से ट्रेन के जरिए बैंगलोर से कुंबुम तक पहुंचने में लगभग 11 घंटे लगते हैं, इसके बाद मंदिर परिसर पहुँचने में लगभग दो घंटे की सड़क यात्रा है।

बैंगलोर से कुरनूल सिटी रेलवे स्टेशन तक कुछ ट्रेनें हैं:

  • मैसूरु- जयपुर एसएफ एक्सप्रेस (12975)
  • प्रशांति एक्सप्रेस (18464)
  • कोंगु एसएफ एक्सप्रेस (12647)
  • वैनगंगा एसएफ एक्सप्रेस (16536)
  • यशवंतपुर- कचेगुडा एक्सप्रेस (16569)

बैंगलोर से हैदराबाद हवाई अड्डे के लिए उड़ानें उपलब्ध हैं जो लगभग 1 घंटे का समय लेती हैं और उसके बाद मंदिर से 3 घंटे की लंबी सड़क यात्रा है ।

टैक्सी और बसें बैंगलोर से सीधे भ्रामराम्बा मंदिर तक जाती हैं, जिसमें लगभग 9 घंटे लगते हैं और मंदिर तक पहुँचने का सबसे सुविधाजनक तरीका है।

भ्रामराम्बा देवी मंदिर का इतिहास और कथा

भ्रामराम्बा देवी मंदिर का निर्माण लगभग 30,000-40,000 साल पहले का माना जाता है। यह तब से देवी सती के उत्साही भक्तों द्वारा पूजा का एक अत्यंत लोकप्रिय स्थान है। मंदिर मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के आसपास के क्षेत्र में स्थित है जो इसके धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को जोड़ता है।

भ्रामराम्बा देवी मंदिर की ऐतिहासिक कहानी का संबंध कालिका पुराण से है। हिंदू आस्था में यह माना जाता है कि एक बार सती अपने पिता भगवान दक्ष के महान यज्ञ में भाग लेने  अपने पति भगवन शिव को ना बुलाये जाने पर नाराज थीं I यज्ञ में दक्ष द्वारा भगवान शिव का अपमान किया गया था। इससे क्रोधित और शर्मिंदा होकर सती ने महान अग्नि में कूदकर अपना जीवन समाप्त कर लिया। इससे भगवान शिव क्रोधित हो गए और रुद्र तांडव या विनाश का नृत्य शुरू कर दिया और सती के शरीर को अपने कंधों पर ले गए। इसे रोकने के लिए और शिव को शांत करने के लिए, भगवान विष्णु ने अपने चक्र का उपयोग करके सती के शरीर को कई हिस्सों में काट दिया। जहाँ भी ये शरीर के हिस्से पृथ्वी पर गिरे उन्हें “शक्तिपीठ” के रूप में जाना जाता है जो आज भी लोगों द्वारा वो स्थान पूजे जाते हैं।

किंवदंती है कि नालमाल्ला की पहाड़ियाँ पर सती की गर्दन गिरी थी। इस मंदिर को महाशक्ति पीठों या शक्ति के दिव्य स्थानों में से एक के रूप में पूजा जाता है।

मंदिर से जुड़ी एक अन्य लोकप्रिय किंवदंती में अरुणासुर राक्षस का संहार शामिल है जिसे भगवान ब्रह्मा से एक वरदान प्राप्त था, कि जिसके अनुसार किसी भी दो या चार पैर वाले जीवित प्राणी द्वारा उसको नहीं मारा जा सकता था I उसे पराजित करने के लिए, देवी दुर्गा ने भ्रामरी या भ्रामराम्बिका का रूप धारण किया और राक्षस को मारने के लिए हजारों छह पैरों वाली मधुमक्खियों का निर्माण किया। वह इस प्रकार मधुमक्खियों की मां के रूप में जानी जाने लगी और देवी को मनाने के लिए इस मंदिर का निर्माण किया गया।

भ्रामराम्बा देवी की मूर्ति के आठ हाथ हैं और उन्हें हमेशा रेशम की साड़ी में सजाया जाता है। मंदिर के गर्भगृह में संत अगस्त्य की पत्नी लोपामुद्रा की मूर्ति भी है।  श्री यंत्र जो कि हिंदुओं में अत्यधिक पूजनीय है, को गर्भगृह के सामने रखा गया है।

नल्लमाला पहाड़ियों पर स्थित भ्रामराम्बा देवी मंदिर, जो पहले श्रीगिरि या श्रीपार्वथा के नाम से जानी जाती थी, देश के सबसे महत्वपूर्ण शक्ति तीर्थ स्थल में से एक है। मंदिर का सभी महत्वपूर्ण हिंदू शास्त्रों जैसे महाभारत और स्कंद पुराण में उल्लेख मिलता है।

मंदिर का मुख पूर्व दिशा की ओर है और मल्लिकार्जुन मंदिर परिसर के पीछे स्थित है। भ्रामराम्बा देवी मंदिर को सुशोभित करने वाली मूर्तिकला बहुत जटिल और असाधारण है। मंदिर परिसर में द्रविड़ शैली का एक विमान भी मौजूद है।

भ्रामराम्बा देवी मंदिर दर्शन के लिए सबसे उचित समय

भ्रामराम्बा देवी मंदिर सप्ताह के सभी दिनों में आगंतुकों के लिए खुला रहता है। देवी सती की पूजा करने के लिए दुनिया भर से हजारों भक्त हर दिन भ्रामराम्बा देवी मंदिर आते हैं। मंदिर बहुत ही जीवंत है और विशेष त्योहारों पर आगंतुकों से भरा होता है।

नवरात्रि का नौ दिन का त्यौहार अश्विन माह में बड़े हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है। चैत्र (अप्रैल के आसपास) के महीने में, कुंभ का स्थानीय त्योहार भी यहाँ मनाया जाता है। मंदिर में हर साल देवी भ्रामराम्बा का प्रसाद पाने के लिए तीर्थयात्रियों और पर्यटकों का तांता लगा रहता है और उनके आशीर्वाद के लिए यहाँ आते हैं ।

मंदिर में आम जनता के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है। मंदिर के दरवाजे सुबह 4:30 बजे से शाम के 10:00 बजे शाम तक भक्तों के लिए खुले रहते हैं। दिन का समापन देवी की आरती के साथ किया जाता है और उसके बाद द्वार बंद हो जाता है। नवरात्रि और कुंभम जैसे विशेष अवसरों के दौरान समय बदल दिया जाता है।

भ्रामराम्बा देवी मंदिर क्यों जाएँ

भ्रामरम्बा देवी मंदिर की उत्कृष्ट प्राकृतिक  सौन्दर्यता और बेजोड़ आध्यात्मिक आभा इसे पर्यटकों, तीर्थयात्रियों और भक्तों के बीच लोकप्रिय बनाती है। मंदिर आध्यात्मिकता और भक्ति का केंद्र है। आगंतुक इस मंदिर में प्रकृति के चमत्कारों और दिव्यता का सही मिश्रण देख सकते हैं। प्राचीन काल से, भ्रामराम्बा देवी मंदिर अनगिनत लोगों के लिए आस्था और श्रद्धा का केंद्र रहा है, जो यहां आंतरिक शांति,  दिव्यता, मार्गदर्शन और आध्यात्मिक ऊर्जा की तलाश में आते हैं।

आध्यात्मिक जागृति और मन की शांति पाने के लिए हर साल हजारों भक्त भ्रामराम्बा देवी मंदिर जाते हैं। इस मंदिर का शांत वातावरण और पवित्रता काफी दुर्लभ है। मंदिर परिसर के पास नल्लामाला पर्वत और पास ही बहने वाली कृष्णा नदी की आश्चर्यजनक सुंदरता इसके आकर्षण में इजाफा करती है। आंतरिक शांति और अध्यात्मिक शांति की तलाश में हर साल बहुत से श्रद्धालु और पर्यटक यहां आते हैं।

हिंदू धर्म के लोगों के बीच यह आम धारणा है कि वे इस पवित्र मंदिर में जो भी कामना करते हैं वह पूरी होती है। देवी मां या आदिशक्ति में विश्वास और भ्रामराम्बा देवी मंदिर से उसके जुड़ाव के कारण यह तीर्थयात्रियों और भक्तों के बीच लोकप्रिय है।

भ्रामराम्बा देवी मंदिर के आसपास दर्शनीय स्थल

मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर भ्रामराम्बा देवी मंदिर के परिसर में ही स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जो भ्रामराम्बा देवी के पति रूप में हैं। यह भारत के बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है। मंदिर को दक्षिण के कैलाश के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर वास्तुकला की द्रविड़ शैली में बनाया गया है और जिसमे सुनहरे आवरण के साथ एक छोटा काला लिंग है। मंदिर के उत्तर में पांडवों द्वारा स्थापित पांच लिंग हैं। मंदिर में शिवरात्रि, दशहरा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे अवसरों पर भव्य समारोह होते हैं।

इता कामेश्वरी मंदिर श्रीशैलम से 20 किमी की दूरी पर स्थित है। यह प्राचीन मंदिर देवी पार्वती को समर्पित है। 8 वीं शताब्दी में निर्मित, यह मंदिर एक गुफा के अंदर स्थित है। तथ्य यह है कि पत्थर से बनी होने के बावजूद मूर्ति का माथा उतना ही मुलायम है जितना कि मानव की त्वचा I इसलिए यह देश के सबसे अनोखे मंदिरों में से एक है। यह मंदिर घने जंगल के अंदर स्थित है और इस मंदिर की प्राकृतिक सुंदरता दर्शनीय है।

सिखेश्वरम मंदिर समुद्र तल से 2830 फीट की ऊंचाई पर श्रीशैलम पहाड़ियों पर स्थित एक प्राचीन पत्थर का मंदिर है। मंदिर में एक गर्भगृह, एक अंतरालय और 16 खंभों का एक बरामदा हैं। स्थानीय लोगों की यह धारणा है कि इस मंदिर की एक मात्र झलक मानव आत्मा को पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त कर देती है। जिस पर्वत पर यह मंदिर स्थित है, उसके शिखर तक पहुँचने के लिए भक्तों को 150 सीढ़ियों की चढाई करनी पड़ती है।

श्रीशैलम से 87 किमी की दूरी पर उमा महेश्वर मंदिर है। यह मंदिर दूसरी शताब्दी में बनाया गया था और यह महबूबनगर जिले में नल्लमालई वन में स्थित है। उमा महेश्वर को श्रीशैलम के पवित्र शहर का उत्तरी प्रवेश द्वार माना जाता है। मंदिर भगवान मल्लिकार्जुन (शिव) और देवी भ्रामराम्बा (पार्वती) को समर्पित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग से लगभग 10 मिनट की पैदल दूरी तय करनी होती है। मंदिर के हरे भरे परिसर और नल्लामलाई के जंगलों की सुंदरता इसके आगंतुकों को एक असाधारण अनुभव प्रदान करती है।

Image source: srisailamtourism

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